दिल्ली: छात्र आंदोलन में पुलिस की बर्बरता पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला
दिल्ली: छात्र आंदोलन में पुलिस की बर्बरता पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला
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कम शब्दों में कहें तो, दिल्ली में छात्र प्रदर्शन, जो परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ, अब एक गंभीर राजनीतिक और कानूनी विवाद बन गया है।
नई दिल्ली। देश की राजधानी में चल रहा युवाओं का विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप एक छात्र, साहिल लोचाब, गंभीर रूप से घायल हो गए। साहिल की दाहिनी आंख पुलिस की कार्रवाई में बुरी तरह चोटिल हुई है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ पुलिस ने पैलेट गन का उपयोग किया, जिससे एक होनहार छात्र की दृष्टि जाने का खतरा पैदा हो गया है।
कौन हैं साहिल लोचाब और कैसे हुई यह घटना?
साहिल लोचाब, जो दिल्ली के नजफगढ़ से हैं, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हैं। एक साधारण परिवार से आने वाले साहिल अपनी आर्थिक मदद के लिए पार्ट-टाइम कार चलाते हैं। वह खुद सरकारी भर्ती परीक्षाओं (एसएससी) की तैयारी कर रहे थे और हालिया पेपर लीक मामलों से बहुत प्रभावित हुए थे। 20 जुलाई को, जब साहिल ने अपनी जायज मांगों के लिए जंतर-मंतर पर ‘संसद मार्च’ में भाग लिया, तो वह पुलिस के साथ हुई झड़प में घायल हो गए। राहुल गांधी के अनुसार, साहिल जब तिरंगा लेकर खड़े थे, तब पुलिस की ओर से चलाए गए छर्रों ने उनकी आंख को निशाना बनाया। एम्स ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार, साहिल की सर्जरी की गई है, जिसमें डॉक्टरों ने उनकी आंख से धातु के टुकड़े निकाले हैं। हालाँकि, उनकी दृष्टि वापस पाने की बहुत कम संभावना है।
दिल्ली पुलिस के दावों पर उठे सवाल और विपक्ष की मांग
घटना के बाद, दिल्ली पुलिस ने पैलेट गन या छर्रों के उपयोग से इंकार किया, लेकिन राहुल गांधी ने साहिल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस के इस दावे को झूठा बताया। राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार से तीन प्रमुख सवाल पूछते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को छात्रों के खिलाफ इस बर्बरता के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी की और कहा कि जिन्होंने निहत्थे छात्रों पर बल प्रयोग किया, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि पुलिस का इनकार अब वैज्ञानिक साक्ष्यों के समक्ष टिक नहीं पा रहा है।
‘कॉकरोच आंदोलन’ और छात्रों का अडिग संघर्ष
दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के बैनर तले शुरू हुआ यह युवा आंदोलन अब एक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ हजारों छात्र जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। 20 जुलाई को पुलिस ने छात्रों को रोकने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया, जिसमें 60 से अधिक छात्र और 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे। प्रशासन द्वारा जंतर-मंतर से टेंट और मंच हटाने के बावजूद, छात्र भारी बारिश में भी वहाँ से हटने को तैयार नहीं हैं। उनकी मुख्य मांग है एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और दोषियों को कड़ी सजा दिलाना।
सड़क से संसद तक मचे घमासान की प्रमुख कड़ियां
छात्रों पर हुई कार्रवाई के विरोध में राजनीतिक पारा चरम पर है। 21 जुलाई को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच किया, जहां उन्हें हिरासत में लिया गया। इसके बाद, 23 जुलाई को विपक्षी सांसदों ने ‘गांधी स्मृति’ तक मार्च निकालकर छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई। संसद के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे पर भारी हंगामा हो रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार चर्चा से भाग रही है और पुलिस के जरिए युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। साहिल लोचाब की चोट इस आंदोलन का एक मानवीय और भावुक चेहरा बन गई है, जिसने सरकार की घेराबंदी को और मजबूत कर दिया है।
फिलहाल, इस विवाद का असर देश की राजनीति पर गहरा पड़ सकता है, और छात्रों के अधिकारों की रक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
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सादर, टीम नैनीताल समाचार
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