गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से राज्यपाल गुरमीत सिंह की ऐतिहासिक भेंट, आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष पर वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद

May 1, 2026 - 08:30
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गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से राज्यपाल गुरमीत सिंह की ऐतिहासिक भेंट, आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष पर वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से राज्यपाल गुरमीत सिंह की ऐतिहासिक भेंट, आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष पर वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से राज्यपाल गुरमीत सिंह की ऐतिहासिक भेंट, आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष पर वैश्विक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण संवाद

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कम शब्दों में कहें तो, आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में बेंगलुरु में उत्तराखंड राज्यपाल गुरमीत सिंह और गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के बीच हुई मुलाकात ने वैश्विक शांति और राष्ट्र निर्माण पर विशेष जोर दिया।

बेंगलुरु, 28 अप्रैल 2026। आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना वर्ष के इस खास मौके पर, उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने बेंगलुरु के आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से एक विशेष मुलाकात की। यह भेंट वास्तव में सेवा, आध्यात्मिकता, राष्ट्र निर्माण और वैश्विक शांति के साझा संकल्प का प्रतीक बन गई।

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर और राज्यपाल गुरमीत सिंह

राज्यपाल गुरमीत सिंह का स्वागत आश्रम परिसर में बड़े ही गर्मजोशी के साथ किया गया। उन्होंने प्रतिष्ठित एम्फीथिएटर में आयोजित विशेष सत्संग में भाग लिया, जहाँ उन्होंने गुरुदेव के साथ चर्चा की। इसके साथ ही, उन्होंने संस्था की गौशाला का भ्रमण भी किया, जो देशी नस्लों के संरक्षण और सतत जीवनशैली के प्रति आर्ट ऑफ लिविंग की प्रतिबद्धता की प्रतीक है।

राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत और कंप्यूटर विज्ञान के बीच एक गहरा संबंध है। उन्होंने यह भी बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य में “परम बुद्धिमत्ता” और “ब्रह्मांडीय बुद्धिमत्ता” के विकास की दिशा में सक्रिय हो सकती है। उन्होंने विश्व शांति की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मानवता को अधिक शांतिपूर्ण, जागरूक और करुणामय दिशा में विकसित होना चाहिए। अपने संबोधन का समापन उन्होंने शांति मंत्र के साथ किया।

आर्ट ऑफ लिविंग, जिसकी स्थापना 1981 में हुई थी, आज विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक बन गया है। ध्यान, योग, प्राणायाम, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, आपदा राहत और मानवीय सेवा के माध्यम से संस्था ने 182 देशों में 80 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई है।

45वें स्थापना वर्ष के अवसर पर, इंटरनेशनल सेंटर में एक विश्वस्तरीय ध्यान मंदिर का उद्घाटन किया जा रहा है, जो विश्व के सबसे बड़े ध्यान स्थलों में से एक बनने की दिशा में विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र लाखों साधकों के लिए शांति, उपचार और आंतरिक संतुलन का एक वैश्विक केंद्र बनेगा।

उत्तराखंड में सेवा और जनकल्याण में योगदान

आर्ट ऑफ लिविंग ने उत्तराखंड में आपदा राहत और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण कार्य किया है। 2013 की भीषण आपदा के समय, संस्था के स्वयंसेवकों ने राहत शिविर आयोजित किए और सामग्री वितरण में मदद की। वहीं, 2025 की उत्तरकाशी-धराली फ्लैश फ्लड्स के दौरान, उन्होंने दूरदराज के इलाकों में राहत सामग्री पहुँचाई।

संस्था ने प्राकृतिक खेती, वृक्षारोपण और महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रमों के माध्यम से हिमालयी क्षेत्रों में सतत विकास को नई दिशा दी है। रुद्रप्रयाग सहित कई क्षेत्रों में महिला किसानों ने रसायनमुक्त खेती अपनाकर आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण हासिल किया है।

राष्ट्रीय स्तर पर 45 वर्षों की उपलब्धियाँ

आर्ट ऑफ लिविंग ने देशभर में 1,327 निःशुल्क विद्यालय संचालित किए हैं, जहाँ 1.2 लाख से अधिक वंचित बच्चों को शिक्षा मिल रही है। संस्था के नदी पुनर्जीवित करने वाले अभियानों के माध्यम से 75 नदियाँ और सहायक धाराएँ पुनर्जीवित की गई हैं। प्राकृतिक खेती कार्यक्रमों ने 30 लाख किसानों को लाभ पहुँचाया है।

गुरमीत सिंह की इस विशेष उपस्थिति ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि स्थायी सामाजिक परिवर्तन का आधार व्यक्ति की आंतरिक शांति, सेवा और सामूहिक चेतना में निहित है। आर्ट ऑफ लिविंग का 45वाँ स्थापना वर्ष इसी वैश्विक दृष्टि को और विस्तारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

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सादर, टीम नैनीताल समाचार
जया रानी

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