उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी परिषद ने मुख्यमंत्री धामी को भेजा ज्ञापन, चार प्रमुख मांगें पेश की
उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी परिषद ने मुख्यमंत्री धामी को भेजा ज्ञापन, चार प्रमुख मांगें पेश की
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी परिषद ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चार महत्वपूर्ण मांगों का ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में सेनानियों को उचित सम्मान देने की अपील की गई है, जिसमें ₹20,000 की मासिक पेंशन और राज्य अतिथि गृहों में निशुल्क ठहराव की माँग शामिल है।
खटीमा - उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी परिषद ने सोमवार को मुख्यमंत्री धामी को संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार के माध्यम से प्रेषित किया। परिषद ने इस ज्ञापन में कहा कि राज्य निर्माण में अपना जीवन समर्पित करने वाले सेनानियों को अभी भी उचित सम्मान और सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।
चार सूत्रीय मांगें
परिषद की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- सेनानियों को “आंदोलनकारी” के बजाय “उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी” के रूप में परिभाषित किया जाए, जिससे उनके योगदान को सही सम्मान और पहचान मिल सके।
- सेनानियों को आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों की तर्ज पर ₹20,000 मासिक पेंशन प्रदान की जाए।
- मानक पूर्ण करने वाले अचिन्हित एवं वंचित राज्य निर्माण सेनानियों को शीघ्र चिन्हित कर सम्मान सूची में शामिल किया जाए।
- राज्य निर्माण सेनानियों के लिए उत्तराखंड सहित देशभर के राजकीय अतिथि गृहों में निशुल्क आवास व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
परिषद ने यह भी कहा कि राज्य निर्माण सेनानियों का संघर्ष उत्तराखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है, और उनका सम्मान राज्य सरकार की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है। परिषद ने आशा व्यक्त की है कि राज्य सरकार उनके मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी जिससे कि राज्य निर्माण सेनानियों को उनका स्वाभाविक अधिकार मिल सके।
ज्ञापन सौंपने के मौके पर उपस्थित सेनानी
ज्ञापन सौंपने वालों में परिषद अध्यक्ष शिव शंकर भाटिया, देवेंद्र बिष्ट, चंद्र प्रकाश, दुर्गा सिंह सामंत, अली अहमद आढ़ती, गंगोत्री देवी, जीवन चंद्र भट्ट, बसंती देवी, मदन मोहन जोशी, महेश सोनकर, मो. बदर सिद्दीकी, राम सिंह धामी, रमा अग्रवाल, पूनम अग्रवाल, वंदना तिवारी, हरिओम, द्रौपदी भट्ट, कौशल्या भंडारी, नवीन चंद सहित अनेक सेनानी मौजूद रहे।
उन सभी ने मिलकर मुख्यमंत्री से अपील की कि उन्हें राज्य निर्माण सेनानी के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि उनकी सेवा और बलिदान को सही मायनों में पहचाना जा सके।
राज्य निर्माण सेनानियों की महत्वपूर्ण मांगों का यह ज्ञापन एक प्रमुख घटनाक्रम है जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार को भविष्य में इनके लिए बेहतर नीतियों को लागू करने की आवश्यकता है।
इसके अलावा, प्रदेश में स्थिति को बदलने और सेनानियों के प्रति सच्चे सम्मान को स्थापित करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है।
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टीम नैनिताल समाचार द्वारा, राधिका शर्मा
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