Himachal: छह साल बाद कर्तव्य पथ पर दिखेगी हिमाचल की वीरगाथा और परमवीर चक्र विजेताओं को दी जाएगी सलामी

Jan 1, 2026 - 08:30
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Himachal: छह साल बाद कर्तव्य पथ पर दिखेगी हिमाचल की वीरगाथा और परमवीर चक्र विजेताओं को दी जाएगी सलामी

शिमला। हिमाचल प्रदेश के लिए एक गौरवशाली क्षण आ गया है। छह साल के लंबे इंतजार के बाद अब हिमाचल की झांकी 26 जनवरी को नई दिल्ली के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड की शोभा बढ़ाती नजर आएगी। केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति ने प्रदेश की वीरगाथा को प्रदर्शित करने वाली झांकी को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के बाद हिमाचल प्रदेश ने झांकी को तैयार करने का काम जोर शोर से शुरू कर दिया है। देवभूमि के साथ साथ वीरभूमि के रूप में विख्यात हिमाचल का यह प्रदर्शन देश की सैन्य शक्ति और शौर्य परंपरा में चार चांद लगाएगा।

हिमाचल प्रदेश भाषा कला एवं संस्कृति विभाग ने झांकी को मूर्त रूप देने के लिए निविदाएं भी आमंत्रित कर दी हैं। इस बार की झांकी की थीम वीर नमन रखी गई है जो प्रदेश के उन शूरवीरों को समर्पित होगी जिन्होंने देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। झांकी में प्रदेश की वीर गाथा की शुरुआत देश के पहले परमवीर चक्र विजेता सोमनाथ शर्मा से होगी। हिमाचल प्रदेश को यह गौरव प्राप्त है कि यहां से चार परमवीर चक्र विजेता निकले हैं।

गणतंत्र दिवस की इस भव्य झांकी में परमवीर, अशोक और महावीर चक्र विजेताओं की तस्वीरें प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएंगी। इसके साथ ही हिमाचल की पहचान माने जाने वाले बर्फ से ढके पहाड़ों की भव्य झलक भी दुनिया देखेगी। प्रदेश की वीरता की ये गाथाएं भारतीय सैन्य इतिहास का एक अभिन्न और सुनहरा हिस्सा हैं। विभाग की निदेशक रीमा कश्यप ने बताया कि हिमाचल के वीर जवानों ने अब तक 1203 वीरता पदक हासिल किए हैं जिनमें चार परमवीर, दो अशोक और 10 महावीर चक्र शामिल हैं जो प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

इतिहास पर नजर डालें तो इससे पहले हिमाचल की झांकियां अलग अलग विषयों पर कर्तव्य पथ पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। 1993 में हिमाचल के पर्यटन और बर्फबारी का आनंद, 1998 में कुल्लू दशहरा की रघुनाथ रथ यात्रा, 2007 में लाहौल स्पीति के मठों और भिक्षुओं का चित्रण, 2012 में किन्नौर की जनजातीय संस्कृति और कारीगरी, 2017 में चंबा रूमाल की पारंपरिक कढ़ाई और 2018 में लाहौल स्पीति के मठ का एक हजार वर्ष पुराना विरासत स्वरूप दिखाया गया था। आखिरी बार 2020 में कुल्लू दशहरा की झांकी प्रदर्शित हुई थी। अब छह साल बाद एक बार फिर हिमाचल की संस्कृति और वीरता का संगम कर्तव्य पथ पर देखने को मिलेगा।

 

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