उत्तराखंड: हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत के विकास के लिए उच्च स्तरीय आयोग का ऐलान किया

Dec 2, 2025 - 08:30
 145  501.8k
उत्तराखंड: हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत के विकास के लिए उच्च स्तरीय आयोग का ऐलान किया
उत्तराखंड: हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत के विकास के लिए उच्च स्तरीय आयोग का ऐलान किया

हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऐलान

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Nainital Samachar

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में एक अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में सांस्कृतिक भाषा को बढ़ावा देने के लिए उच्च स्तरीय आयोग की स्थापना की घोषणा की है।

हरिद्वार. उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। रविवार को धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार संस्कृत के उत्थान और समग्र विकास के लिए एक 'उच्च स्तरीय आयोग' का गठन करेगी। यह आयोग संस्कृत को आम बोलचाल की भाषा बनाने एवं रोजगार से जोड़ने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करेगा।

सम्मेलन का उद्देश्य और मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण

इस दो दिवसीय सम्मेलन का विषय 'भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक ज्ञान के विकास में संस्कृत का योगदान' रखा गया था। इस अवसर पर, मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा, और विज्ञान का आधार है। उन्होंने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कक्षा नौ तक संस्कृत का अध्ययन किया था। सीखे गए श्लोक और व्याकरण आज भी उनके जीवन का हिस्सा हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वेद, पुराण, उपनिषद, आयुर्वेद और खगोलशास्त्र सब कुछ संस्कृत में रचा गया है। यह संज्ञान से वेदांत तक की प्रणाली को उजागर करता है जिसने भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संस्कृत को बढ़ावा देने की योजनाएँ

मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार द्वारा संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे कई योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए 'गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना' चलाई जा रही है, जिसके तहत छात्राओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा, एससी और एसटी वर्ग के छात्रों के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रवृत्ति योजना और प्रतिभा सम्मान योजना के तहत नकद पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं।

आदर्श संस्कृत ग्राम की स्थापना

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने प्रदेश के हर जिले में 'आदर्श संस्कृत ग्राम' स्थापित करने का संकल्प लिया है। यह पहल ग्रामीणों को संस्कृत का उपयोग अपनी दिनचर्या में करने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक के मट्टूर गांव में लोग संस्कृत में बात कर सकते हैं, तो उत्तराखंड में ऐसा क्यों नहीं हो सकता।

नई शिक्षा नीति और तकनीक का बोध

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना की, जो नई शिक्षा नीति में संस्कृत को आधुनिक और व्यावहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने पर जोर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के माध्यम से ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स की मदद से संस्कृत को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि आगे चलकर संस्कृत सिर्फ पूजा-पाठ की भाषा बनकर नहीं रहेगी, बल्कि इसे विज्ञान और तकनीकी की भाषा भी बनाया जाएगा।

सम्मेलन में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, विधायक आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा, स्वामी यतीश्वरानंद, विदेश सचिव मीना मल्होत्रा और संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश चंद्र शास्त्री समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह घोषित योजना संस्कृत प्रेमियों और विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।

इस प्रकार, मुख्यमंत्री धामी की यह घोषणा संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के उत्थान के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इसके माध्यम से राज्य सरकार संस्कृत को समाज में पुनर्स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जो निस्संदेह महत्वपूर्ण है।

अधिक जानकारी और ताजातरीन अपडेट के लिए, कृपया [Nainital Samachar](https://nainitalsamachar.com) पर जाएं।

सादर,

नीता भटनागर
Team Nainital Samachar

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0