उत्तराखंड: समान नागरिक संहिता दिवस पर मुख्यमंत्री धामी का शक्तिशाली संदेश, कुप्रथाओं का उन्मूलन आवश्यक
उत्तराखंड: समान नागरिक संहिता दिवस पर मुख्यमंत्री धामी का शक्तिशाली संदेश
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के सफल लागू होने की पहली वर्षगांठ पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया, जिसमें उन्होंने सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ प्रहार की आवश्यकता को बताया।
देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर मंगलवार को राजधानी के हिमालयन कल्चरल सेंटर में प्रथम ‘समान नागरिक संहिता दिवस’ का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे देवभूमि के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय करार दिया। उन्होंने बताया कि यूसीसी केवल एक कानून नहीं है, बल्कि यह समाज में वास्तविक न्याय, लैंगिक समानता और संवैधानिक मर्यादाओं को स्थापित करने का एक ऐतिहासिक संकल्प है।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन की शुरुआत गीता के श्लोकों और सनातन संस्कृति के समरसता के संदेश से की। उन्होंने कहा, "भारतीय संविधान के निर्माताओं, विशेषकर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 44 के तहत जो सपना देखा था, उसे उत्तराखंड सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में साकार किया है।" उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने 2022 के विधानसभा चुनावों के संकल्प पत्र में यूसीसी लागू करने का वादा किया था, जिसे उन्होंने सत्ता में वापस आने के बाद प्राथमिकता के साथ कार्यान्वित किया। 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना था।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में यूसीसी का प्रभाव
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में यूसीसी के सकारात्मक प्रभावों को चर्चा करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून ने मुस्लिम बहनों और बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह और तीन तलाक जैसी घृणित कुरीतियों से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद पिछले एक वर्ष में उत्तराखंड में बहुविवाह या हलाला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इस विषय पर उन्होंने कड़े शब्दों से कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण दशकों तक इस साहस को नहीं दिखाया गया, लेकिन उत्तराखंड ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से सामाजिक बुराइयों को कानूनी रूप से समाप्त किया जा सकता है।
समान नागरिक संहिता का मानवता के प्रति दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी भी धर्म या आस्था के खिलाफ नहीं है। यह कानून सिर्फ कुप्रथाओं को मिटाकर ‘समानता से समरसता’ लाने का प्रयास है। उन्होंने संपत्ति के अधिकारों में बच्चों के बीच भेदभाव को समाप्त करने और मृतक की संपत्ति पर पत्नी, बच्चों और माता-पिता को समान अधिकार देने के प्रावधानों को मानवीय दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
इसके साथ ही, युवाओं की सुरक्षा के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति में कानूनी सुरक्षा मिल सके। इसके तहत लिव-इन से जन्मी संतानों को भी जैविक संतानों के समान ही सभी अधिकार प्राप्त होंगे।
प्रशासन की भूमिका में परिवर्तन
यूसीसी की सफलता को प्रशासनिक स्तर पर उल्लेख करते हुए, मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस कानून ने सरकारी सेवाओं को बेहद सुलभ बना दिया है। पहले जहां राज्य में औसतन सिर्फ 67 विवाह पंजीकरण प्रतिदिन होते थे, वह अब बढ़कर 1400 से अधिक हो गए हैं। राज्य की 30 प्रतिशत ग्राम पंचायतों ने शत-प्रतिशत दंपत्तियों का पंजीकरण पूरा कर लिया है। पिछले एक वर्ष में 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत का समयबद्ध निस्तारण किया गया है।
कानून में किए गए हालिया संशोधन
मुख्यमंत्री ने हालिया संशोधनों पर भी चर्चा की, जिसके तहत अब विवाह के समय पहचान छिपाने या गलत तथ्य पेश करने पर शादी को निरस्त करने का कड़ा प्रावधान है। उन्होंने विरोधियों द्वारा फैलाई जा रही भ्रांतियों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि यूसीसी के माध्यम से कोई बाहरी व्यक्ति राज्य का ‘मूल निवासी’ नहीं बन सकता। उन्होंने ‘लैंड जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ के विरुद्ध की जा रही कार्रवाइयों का बचाव करते हुए कहा कि अगर राष्ट्रहित में बोलना हेट स्पीच है, तो वे इसे स्वीकार करते हैं।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तराखंड की यह नई कानूनी धारा जल्द ही पूरे देश को समानता का मार्ग दिखाएगी।
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आपका लेखन: टीम नैनिताल समाचार (संगीता शर्मा)
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